ब्रह्मचर्य की रक्षा
वेद ने लड़के तथा लड़कियों कि शिक्षा की अलग व्यवस्था का आदेश दिया है। स्वामी दयानन्द सरस्वती तो स्पष्ट कहते हैं कि दोनों की पाठशालाएं अलग-अलग हों, पुरुषों की शाला में पुरुष तथा लड़कियों की पाठशाला में महिलाएं ही शिक्षा देवें और दोनों की पाठशालाओं में कम से कम पाँच किलोमीटर की दुरी हो।
इस से स्पष्ट होता है कि वेद के आदेशों का अक्षरशः पालन करने वाले हमारे ऋषि दोनों की अलग शिक्षा के पक्षपाती थे। अलग शिक्षा में भी उनकी इच्छा थी कि स्त्रियों की शाला में केवल स्त्रियाँ और पुरुषों की शाला में केवल पुरुष ही शिक्षा देने वाले रहें ताकि बालकों और शिक्षकों के मध्य भी किसी प्रकार की चर्चा उनकी हानि का कारण न बन जावे। दोनों की शाला में दूरी भी इतनी करने को कहा गया है ताकि किसी भी अवस्था में दोनों में किसी प्रकार का मेल जोल अथवा बातचीत न हो सके। यह सब उनके ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए किया जाता था ताकि उनकी सोच, उनकी शक्ति केवल और केवल शिक्षा प्राप्ति में ही लगे और वह उत्तम से उत्तम शिक्षा प्राप्त कर संसार के कल्याण के लिए आगे आवें।
The Vedas mandate separate education for boys and girls. Swami Dayanand Saraswati clearly states that schools for both should be separate, with men teaching in men's schools and women teaching in girls' schools, and that the two schools should be at least five kilometers apart.
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